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संजलि 

आगरा:-आगरा के लालऊ गाँव की 15 साल की संजली को 18 दिसंबर को 2 बाइक सवार युवकों ने पेट्रोल डाल कर ज़िंदा जला दिया। इस वारदात से पूरा प्रदेश दहल गया। जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त संजली स्कूल से साइकिल मे अपने घर लौट रही थी। तभी पीछे से आते हुए दो युवकों ने उसे रोका और पेट्रोल डाल कर आग लगा दी। उन दोनों युवकों ने संजली को साइकिल समेत धक्का देकर खाई में गिरा दिया। किसी तरह हिम्मत जुटाते हुए संजली खाई से ऊपर आई। वहा से गुज़र रही बस के ड्राइवर की नज़र आग में सुलगती हुई संजली पर गयी। बस ड्राइवर मुकेश कुमार ने बस के फायर एक्सटिंगईशेर की मदद से आग को बुझाया परंतु तब तक वह 80% जल चुकी थी। संजली को S.N मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया गया, हालात गम्भीर होने के कारण संजली को वहा से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। 


संजलि के आखिरी शब्द



संजलि ओर उसकी माँ


अस्पताल में अपनी माँ से बात करते हुए उसने बताया कि वह युवको को देख नही पायी क़्योंकि उन्होंने हैलमेट पहना हुआ था जिसमे से एक लड़के ने उसपर पेट्रोल डाला और लाइटर से आग लगा दी।संजलि ने कहा मां, ये दर्द मुझसे सहन नहीं हो रहा है, बहुत जलन हो रही है। अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे पूरा बदन आग से घिरा हो। मां बताओ ना, डॉक्टर क्या कह रहे हैं, मैं बच पाऊंगी या नहीं। संजलि ने कुछ और भी बातें बताई थीं।वह कह रही थी मुझे चाचा विजय बहुत परेशान करते थे, रास्ता रोकते थे, पर ये भी पुरानी बातें हैं। संजलि के आखिरी शब्द यही थे, मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है, ऐसा किसी के साथ न हो, अगर मैं बची और पता चला कि मुझे किसने जलाया, तो उन्हें छोड़ेंगी नहीं, खुद सजा दूंगी। इसके बाद मां से वचन लिया, अगर मैं न बच पाऊं तो यह काम तुम्हें करना है, मेरे हत्यारों को छोड़ना नहीं।


हादसे का सच सामने आते घरवालो के होश उड़े 


योगेश |  संजली


वारदात वाले दिन ही संजली से बात हो पाई थी जिसके बाद उसकी हालत और नाज़ुक हो गयी। घटना के 36 घंटो बाद जिंदगी के लिए लड़ रही संजली ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। संजली के मौत के अगले दिन 20 तारीख को उसके ताऊ के लड़के(योगेश) ने ज़हर खा के आत्महत्या कर ली। जिसके बाद केस की गुथी पूरी उलझ गई। घटना के 8 दिन बाद यह हादसे का सच सबके सामने आ गया। एसएसपी अशोक ने बताया कि 18 दिसंबर को करीब 2 बजे यह वारदात हुई थी। 19 की रात को उसकी दिल्ली में मौत हो गयी थी। 20 को पुलिस पूछताछ के बाद योगेश ने आत्महत्या कर ली जिसके बाद उसके ऊप्पर शक बढ़ता गया। इसके बाद नवांमील पर लगे सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि घटना में 2 नही 2 से अधिक लोग शामिल है। इस घटना में योगेश के साथ-साथ उसके ममेर भाई विजय और उसके बड़े साले आकाश के साथ मिलकर संजली को जलाया था। वारदात को अंजाम देने के लिए योगेश ने दोनों को 15-15 हज़ार रुपये दिए थे। एसएसपी पाठक ने यह भी बताया कि योगेश और आकाश एक बाइक पर थे और विजय दूसरी बाइक पर था। संजली के पास पहुँच कर योगेश ने आकाश को पैर मारकर बाइक रोकने का इशारा किया जिसके बाद ही योगेश ने पेट्रोल डाल कर और जेब से लाइटर निकाल कर संजली को आग लगा दी।

एसएसपी अमित पाठक के शब्द 

एसएसपी अमित पाठक ने पत्रकार वार्ता में बताया कि योगेश एकतरफा प्यार करता था। इसी में उसने उसको फर्जी सर्टिफिकेट देकर साइकिल गिफ्ट की। संजली और उसके घर वालों को शक न हो इसलिए यह बताया कि यह उसे प्रतियोगिता में मिली थी। पहले संजली को योगेश की नीयत का अहसास नही हुआ परन्तु जैसे जैसे उसे अहसास हुआ संजली ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया जिस बात से नाखुश योगीश ने संजली को सबक सिखाने के लिए उससे जला दिया। आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल लिया है। उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त दोनों बाइक, जले हुए कपड़े, हेलमेट और बैग बरामद कर लिया है।संजलि के पिता हरेंद्र का कहना है कि उन्हें अभी पुलिस की कहानी पर यकीन नहीं है। उन्होंने फोन पर बताया कि हमने पुलिस से कहा कि खुलासे के लिए उनके सामने साक्ष्य रखे जाएं। अगर इनमें दम लगा तो यकीन करेंगे, वरना नहीं। अभी तो हमारा यही मानना है कि योगेश ने पुलिस की पूछताछ से आहत होकर खुदकुशी की है। एसएसपी अमित पाठक ने कहा कि हम खुलासे के बेहद करीब हैं। दो युवकों से पूछताछ की जा रही है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।


संजलि को न्याय मिलना ही चाहिए वो भी जल्दी, 
क्योंकि देर से मिला न्याय अन्याय ही होता है।