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अब मेंस्ट्रुअल कप से बिताइए खुशनुमा मासिकधर्म। पैड के बदले अब आप प्रयोग कर सकती हैं मेंस्ट्रुअल कप, जो बार बार पैड बदलने के झंझट से देगा आपको छुटकारा। यह पैड पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है और मेडिकल उपकरणों से बनाये जाने के कारण ये बिल्कुल सुरक्षित है एवं कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते। यह कप थर्मप्लास्टिक, एलेस्टमोर और सिलिकॉन से बनाई जाती है। इसे पीरियड के वक़्त योनि में पहना जाता है।


कैसे पहना जाता है मेंस्ट्रुअल कप?


इसे ऊपर से फोल्ड कर के पीरियड के वक़्त योनि के अंदर पहना जाता है। इसे कम से कम 12 घण्टे तक पहन सकते हैं। 12 घण्टे बाद ये कप खून से भर जाएगा, आप इसे निकाल कर अच्छे से वाश कर के फिर से प्रयोग कर सकते हैं। शुरू शुरू में आप थोड़ा असहज महसूस कर सकते हैं लेकिन बाद में सब नॉर्मल हो जाएगा।


कप का साइज क्या हो? 



 यह 3 साइज में मिलता है स्मॉल, मीडियम और लार्ज। आपको अपने वेन्जाइना के नाप का साइज सेलेक्ट करना होगा, जिसका आपको अपनी उंगली के माध्यम से टेस्ट करना होगा। लार्ज साइज अधिकतर 30+ महिलाओ को फिट होता है, फिर भी आपको टेस्ट करना होगा। 

कप को कैसे साफ रखें?




इस कप को माहवारी के बाद महीने में एक बार गर्म पानी मे उबाल कर साफ कर लें। अन्यथा इंफेक्शन की सम्भावना हो सकती है।

कहाँ और कितने का मिलता है कप?


ये कप लगभग 500 रुपए के आसपास मिल जाएंगे। जिसे आप कई सालों तक प्रयोग कर सकती हैं। 
      ये कप अभी शहरों में ही मिलते हैं ग्रामीण इलाकों में भी जल्द ही पहुंच जाएंगे।
सूरजकुंड का मेला

दिल्ली से लगे फरीदाबाद में 33वां सूरजकुंड अंतराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला 1फरवरी से आरम्भ हो चुका है। महाराष्ट्र का रायगढ़  का किला 33वें सूरजकुंड अंतराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला का मुख्य आकर्षण रहेगा, इसमें कई देश पहली बार अपना स्टाल लगाएंगे। ये मेला 15 फरवरी तक चलेगा। युवाओं की रुचि के अनुसार यहां आपको सेल्फ़ी पॉइंट भी मिलेंगे।
              यहां पर पार्किंग का विशेष प्रबंध किया गया है। यह एक सांस्कृतिक मेला होने के कारण यहां विभिन्न देशों के संस्कृति, कला, ट्रेडिशन और खान पान देखने को मिलता है। यह मेला, ऑथोरिटी, पर्यटन कल्चर एंड एक्सटर्नल अफेयर्स मंत्रालय एवम हरियाणा टूरिज्म एवं टेक्सटाइल द्वारा मिल कर आयोजित किया जाता है। जहां कई संख्या में पर्यटक आते हैं।

मेले का समय 



यह मेला सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। 

मुख्य केंद्र



मेले का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र का रायगढ़ का किला होगा। ये किला मराठा साम्राज्य का ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। इसके चारों ओर कृतिम झील बनाने की कोशिश भी की गई है। ये पहाड़ी पर बनाया गया है । यह किला लगभग 50 फ़ीट ऊंचे पहाड़ी पर बनाया गया है, जहां पर सीढ़ियां भी तैयार की गई है। लगभग 50 ऊंचाई से आप मेले का सुंदर दृश्य देखने के साथ साथ बढ़िया बढ़िया सेल्फी भी ले सकते हैं।

टिकट


सोमवार से शुक्रवार तक टिकट 120 रुपए की और शनिवार-रविवार यानी 2 दिन 180 रुपए की मिलेगी। काउंटर के अलावा आप ऑनलाइन bookmyshow.com भी टिकट बुक करवा सकते हैं।
10years challange | Rajkumar Rao



सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ न कुछ चैलेन्ज या ट्रेंड चलते रहते हैं। आजकल सोशल मीडिया पर , ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 10years challange धूम मचा रहा है।  यही नही इस चैलेन्ज से कई musically एप्प भी अछूते नहीं हैं। लोग इसे अपने मनोरंजन के लिए स्वीकार भी कर रहे हैं। एक तरफ अपनी 2009और दूसरी तरफ 2019 की फ़ोटो डाली जा रही है, कोलाज पर कोलाज बनाये जा रहे हैं। इस चैलेन्ज को glowupchallange, 2009vs2019 या how hard did aging hit you के नाम से भी जान सकते हो।

 सोशल मीडिया में कितने लोगों ने चैलेन्ज स्वीकार किया ?


   
10 year  challange collage
  केवल इंस्टाग्राम लगभग  29 लाख पोस्ट अलग अलग नामों से की गई है। अब सोचिए इसके अलावा कितनी ही साइट हैं जिन पर ये चैलेन्ज अपलोड की गयी हैं?

अमेरिका पत्रिका वायर ने आशंका जताई है कि फेसबुक लोगों का पर्सनल डेटा जमा कर रहा है। इस तकनीक के द्वारा फेसबुक लोगों के चेहरे के अंतर को समझना चाहता है। इसके द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अल्गोरिथम को दुरुस्त करना चाहता हैं।
           इस पर कुछ लोगों सवाल उठाए की फेसबुक के पास तो पहले से ही सबके डेटा मौजूद हैं। इस पर केट ओ नाइल ने कहा कि कोई ज़रूरी नहीं कि लोगों ने उसी साल या क्रम से फ़ोटो डाली हो। ऐसा करने से फेसबुक को सही सही और पक्का डेटा मिल गया जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अल्गोरिथम के लिए उपयुक्त होगा।
        इस पर फेसबुक ने कहा कि वो लोगों का कोई डेटा नही जमा करता। जिस पर केट ओ नाइल ने उन्हें कैम्ब्रिज अनालीटिका की घटना याद दिलाई, जिसकी चर्चा पूरे विश्व मे हुई। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में भी लोगों के डेटा का इस्तेमाल किया गया था।

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अल्गोरिथम?



आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनावटी तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता से है, जैसे हैल्लो गूगल या अन्य निर्देश द्वारा मशीन से काम करवाना एवम कंप्यूटर द्वारा आपकी सहायता करना जैसी मशीनी बौद्धिक क्षमता ही हैं। 
       अब आप याद कीजिए जब भी आप कोई जानकारी लेने के लिए किसी साइट को ओपन करते हैं, उसके बाद उसके या उससे संबंधित ऐड आपके पास आते ही रहते हैं। कोई अदृश्य तकनीक आपकी पसन्द नापसन्द का ख्याल रखती है, क्योंकि आपकी पसन्द नापसन्द बाज़ार के लिए आवश्यक है।
ये ही अल्गोरिथम है।
            इस तरह के चैलेन्ज से आप पर आए अंतर को भुनाया जा सकता है। उम्र के साथ आये कई नॉर्मल बदलाव को कंपनियां एब्नॉर्मल बता कर अपने प्रोडक्ट की कैम्पनिंग करती हैं। आपका डेटा मार्केट के लिए बेहद अनिवार्य है।

            आशंका तो यहां तक है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिये भी राजनैतिक पार्टियां आपके डेटा को, आपकी मन्शा या रुझान के तौर पर उपयोग कर सकती है।

वर्चुअल दुनिया में भी आप सुरक्षित नहीं है। अतः किसी भी कैम्पनिंग में हिस्सा लेने से पहले उसकी पूरी जानकारी ले लेना आवश्यक है।

धनौल्टी उत्तराखंड के मसूरी पर्यटन स्थल से लगभग 30 किलोमीटर दूर टिहरी गढ़वाल जाने वाली रोड़ पर एक बेहद ही सुंदर और शांत स्थल है, जो धीरेधीरे पर्यटन स्थल का रूप ले रहा है। इसकी सुंदर वादियां आपको ज़िंदगी की भागदौड़ के तनाव को पलभर में ही दूर कर देगी। जहां तक आपकी नज़रे जाएंगी, प्रकृति का मनोरम दृश्य आपको मोह लेगा। धनौल्टी सुंदर देवदार के जंगलों से सुसज्जित है। मसूरी घूमने के बाद आप धनौल्टी की शांत वादियों में कुछ दिन शहर के भीड़ भाड़ से दूर प्रकृति की सुंदरता के बीच बिता सकते हैं। धीरेधीरे ये एक हिल स्टेशन के रूप में स्थापित होता जा रहा है, जिस कारण आपको यहां पर कुछ होटल भी मिल जाएंगे। होटल के अलावा यदि आपको बदलाव चाहिये तो आपको ईको हट्स भी यहां मिलेंगे, जो कि बांस से बने कॉटेज होंगे, जो सौर ऊर्जा से प्रकाशित होंगे।

For couple
      सर्दियों में स्नो फॉल का मजा लेना हो तो धनौल्टी सबसे आदर्श स्थान है। राजधानी दिल्ली के नजदीक होने के कारण वीकेंड में स्नो फॉल का आनंद  बखूबी लिया जा सकता है। मसूरी की तुलना में धनौल्टी में स्नो मेल्ट काफी देर में होती है, यानी स्नो फॉल के बाद भी वहां बर्फ काफी दिनों तक वादियों में बिखरी मिलेगी। जनवरी और फरवरी के मौसम में धनौल्टी के पहाड़ अधिकतर बर्फ की चादर ओढ़े रहते हैं। खेतों और पेड़ों में बिखरी बर्फ की परतें मन मोह लेती हैं। यदि आप प्रकृति प्रेमी एवं एडवेंचर पसन्द हैं तो धनौल्टी आपके लिए आदर्श स्थान है।
धनौल्टी की वादियां

 कैसे पहुंच धनौल्टी?

         आप धनौल्टी, वायु मार्ग, रेल मार्ग एवम सड़क मार्ग से भी जा सकते हैं। वायु मार्ग के लिए देहरादून जॉली ग्रांट हवाई अड्डा जो धनौल्टी से करीबन 82 किलोमीटर दूर है, रेलमार्ग से देहरादून रेलवे स्टेशन, जो धनौल्टी से लगभग 60 किमी दूर है, बस से धनौल्टी पहुंचा जा सकता है।

धनौल्टी पर्यटन स्थल

 

     यहां के पर्यटन स्थल  दशावतार मन्दिर, ईको-पार्क, बारेहीपानी और जोरांडा फॉल्स,  हिमालयन वीवर्स, जैन मंदिर, सुरकंडा देवी, मन्दिर,  आदि हैं। ईको-पार्क मुख्य धनौल्टी बजार में स्थित है। ईको पार्क के लिए आपको बड़ो के लिए 25 रुपये एवम बच्चों के लिए 10 रुपये की टिकट का भुगतान करना होगा।
           यदि आप कम समय में स्नो फॉल का मजा लेना चाहते हैं, बर्फ से ढके पहाड़ों को देखना चाहते हैं, तो देर किसलिए धनौल्टी आपका इंतजार कर रहा है। 
शुभ यात्रा।

  

दिल्ली में जैसे  तेजी से ढंठ बढ़ रही है उसके मुताबिक उतनी ही तेजी से हवा में पॉल्यूटेंट्स (Pollution) कि मात्रा भी बढ़ रही है ये  हेल्थ के लिए  काफी नुकसानदायक  है. इसी को देखते हुए Xiaomi   भारत में पल्यूशन मास्क लॉन्च कर रहा  है.

  पल्यूशन मास्क


Xiaomi भारत में 3 जनवरी को पल्यूशन मास्क  (Pollution Mask) लॉन्च कर सकता है  इससे पहले भी Xiaomi  ने एयर प्यूरिफायर लॉन्च किए हैं भारत  में हालांकि कंपनी अब तक ये साफ नहीं किया है कि वो कैसा मास्क होगा कंपनी की तरफ से एक ट्वीट किया गया है जिसमें मास्क देखा जा सकता है. 
दिल्ली सहित पूरे भारत में ठंढ के मौसम में एयर पल्यूशन बढ़ जाता है और पल्यूशन कि मात्रा भी बढ़ जाती  है ऐसे में बाहर सांस लेना खतरनाक माना जाता है. अस्थमा  के मरीजों के लिए ये काफी हानिकारक साबित होता है 

 Xiaomi अपने देश चीन में पहले से एंटी फॉग और एंटी पल्यूशन मास्क बेचता है उम्मीद है की कंपनी बिल्ट इन एयर फिल्टर वाला मास्क लॉन्च करेगीजैसे उन्होंने चीन में किया था इसकी विशेषता ये थी की इसमें हाई फाइबर टेक्स्टाइल का यूज किया गया है और ये काफी हल्का और सुरक्षित माना गया है इसकी बिक्री ग्रे (grey) कलर में होती है और इसमें एक साइड में एयर फिल्टर लगा हुआ है 

इसके एयर फिल्टर को रिचार्ज कर सकते हैं और इसमें पॉलिमर लिथियम आयन बैटरी लगी है इसे फुल चार्ज करने में 3 से 4 घंटे लगते हैं ये मास्क भारत में लॉन्च होता है या नहीं ये थो कुछ दिनों में पता चलेगा 
इस मास्क की कीमत की बात करें तो दो साल पहले चीन में 89 युआन (लगभग 900 रुपये) में लॉन्च किया गया था. अगर भारत में ये मास्क लॉन्च होता है तो मुमकिन है इसकी कीमत 1500 रुपये तक हो सकती है


संजलि 

आगरा:-आगरा के लालऊ गाँव की 15 साल की संजली को 18 दिसंबर को 2 बाइक सवार युवकों ने पेट्रोल डाल कर ज़िंदा जला दिया। इस वारदात से पूरा प्रदेश दहल गया। जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त संजली स्कूल से साइकिल मे अपने घर लौट रही थी। तभी पीछे से आते हुए दो युवकों ने उसे रोका और पेट्रोल डाल कर आग लगा दी। उन दोनों युवकों ने संजली को साइकिल समेत धक्का देकर खाई में गिरा दिया। किसी तरह हिम्मत जुटाते हुए संजली खाई से ऊपर आई। वहा से गुज़र रही बस के ड्राइवर की नज़र आग में सुलगती हुई संजली पर गयी। बस ड्राइवर मुकेश कुमार ने बस के फायर एक्सटिंगईशेर की मदद से आग को बुझाया परंतु तब तक वह 80% जल चुकी थी। संजली को S.N मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया गया, हालात गम्भीर होने के कारण संजली को वहा से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। 


संजलि के आखिरी शब्द



संजलि ओर उसकी माँ


अस्पताल में अपनी माँ से बात करते हुए उसने बताया कि वह युवको को देख नही पायी क़्योंकि उन्होंने हैलमेट पहना हुआ था जिसमे से एक लड़के ने उसपर पेट्रोल डाला और लाइटर से आग लगा दी।संजलि ने कहा मां, ये दर्द मुझसे सहन नहीं हो रहा है, बहुत जलन हो रही है। अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे पूरा बदन आग से घिरा हो। मां बताओ ना, डॉक्टर क्या कह रहे हैं, मैं बच पाऊंगी या नहीं। संजलि ने कुछ और भी बातें बताई थीं।वह कह रही थी मुझे चाचा विजय बहुत परेशान करते थे, रास्ता रोकते थे, पर ये भी पुरानी बातें हैं। संजलि के आखिरी शब्द यही थे, मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है, ऐसा किसी के साथ न हो, अगर मैं बची और पता चला कि मुझे किसने जलाया, तो उन्हें छोड़ेंगी नहीं, खुद सजा दूंगी। इसके बाद मां से वचन लिया, अगर मैं न बच पाऊं तो यह काम तुम्हें करना है, मेरे हत्यारों को छोड़ना नहीं।


हादसे का सच सामने आते घरवालो के होश उड़े 


योगेश |  संजली


वारदात वाले दिन ही संजली से बात हो पाई थी जिसके बाद उसकी हालत और नाज़ुक हो गयी। घटना के 36 घंटो बाद जिंदगी के लिए लड़ रही संजली ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। संजली के मौत के अगले दिन 20 तारीख को उसके ताऊ के लड़के(योगेश) ने ज़हर खा के आत्महत्या कर ली। जिसके बाद केस की गुथी पूरी उलझ गई। घटना के 8 दिन बाद यह हादसे का सच सबके सामने आ गया। एसएसपी अशोक ने बताया कि 18 दिसंबर को करीब 2 बजे यह वारदात हुई थी। 19 की रात को उसकी दिल्ली में मौत हो गयी थी। 20 को पुलिस पूछताछ के बाद योगेश ने आत्महत्या कर ली जिसके बाद उसके ऊप्पर शक बढ़ता गया। इसके बाद नवांमील पर लगे सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि घटना में 2 नही 2 से अधिक लोग शामिल है। इस घटना में योगेश के साथ-साथ उसके ममेर भाई विजय और उसके बड़े साले आकाश के साथ मिलकर संजली को जलाया था। वारदात को अंजाम देने के लिए योगेश ने दोनों को 15-15 हज़ार रुपये दिए थे। एसएसपी पाठक ने यह भी बताया कि योगेश और आकाश एक बाइक पर थे और विजय दूसरी बाइक पर था। संजली के पास पहुँच कर योगेश ने आकाश को पैर मारकर बाइक रोकने का इशारा किया जिसके बाद ही योगेश ने पेट्रोल डाल कर और जेब से लाइटर निकाल कर संजली को आग लगा दी।

एसएसपी अमित पाठक के शब्द 

एसएसपी अमित पाठक ने पत्रकार वार्ता में बताया कि योगेश एकतरफा प्यार करता था। इसी में उसने उसको फर्जी सर्टिफिकेट देकर साइकिल गिफ्ट की। संजली और उसके घर वालों को शक न हो इसलिए यह बताया कि यह उसे प्रतियोगिता में मिली थी। पहले संजली को योगेश की नीयत का अहसास नही हुआ परन्तु जैसे जैसे उसे अहसास हुआ संजली ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया जिस बात से नाखुश योगीश ने संजली को सबक सिखाने के लिए उससे जला दिया। आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल लिया है। उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त दोनों बाइक, जले हुए कपड़े, हेलमेट और बैग बरामद कर लिया है।संजलि के पिता हरेंद्र का कहना है कि उन्हें अभी पुलिस की कहानी पर यकीन नहीं है। उन्होंने फोन पर बताया कि हमने पुलिस से कहा कि खुलासे के लिए उनके सामने साक्ष्य रखे जाएं। अगर इनमें दम लगा तो यकीन करेंगे, वरना नहीं। अभी तो हमारा यही मानना है कि योगेश ने पुलिस की पूछताछ से आहत होकर खुदकुशी की है। एसएसपी अमित पाठक ने कहा कि हम खुलासे के बेहद करीब हैं। दो युवकों से पूछताछ की जा रही है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।


संजलि को न्याय मिलना ही चाहिए वो भी जल्दी, 
क्योंकि देर से मिला न्याय अन्याय ही होता है।







भारत में एक औरत हर 13 मिनट में बलात्कार की शिकार होती है। (NCRB) यूं तो औरत को न्याय दिलवाने के लिए कई कानून है परंतु पूरी न्याय व्यवस्था उसकी कब्रगाह बन कर रह जाती है। तमाम समानता, स्वतंत्रता की बातों के बावजूद भी उसकी स्थिति दयनीय ही है। केंद्र द्वारा 2007 के रिपोर्ट के अनुसार लगभग 54% महिलाएं पारिवारिक समारोह व उत्सवों में बलात्कार एवं यौन शोषण का शिकार हुई है।

बलात्कार यौन शोषण एवं कानून की लड़ाई अगर वो जैसे तैसे जीत भी जाती है तो, वह समाज से हार जाती है। पुरुष अपनी यौन कुंठाओ के साथ-साथ प्रतिशोध के कारण भी क्रूर और नृशंस बलात्कार करने से बाज नही आता। वह अपनी हवस का शिकार 8 महीने की नवजात, 8 साल की अबोध बालिका,18 साल की युवती, 40 साल की वृद्धा को भी बना लेता है। पुरुष को आपसी दुश्मनी या रंजिश निकालनी हो तो वे दूसरे परिवार की महिलाओं की इज़्ज़त तार-तार कर प्रतिशोध लेता है और जो ये नही करता वो अपनी कुंठा मिटाने के लिए माँ और बहन की गाली दे कर संतुष्टि पा लेता है हालांकि किसी स्त्री के सम्मान या इज़्ज़त का मापदंड योनि नही होना चाहिए ऐसे मेरे विचार है, शायद सबको समझना भी चाहिए।

 धार्मिक ग्रंथों में भी स्त्रियों की स्थिति


भारतीय समाज में धार्मिक ग्रंथों में भी स्त्रियों की स्थिति में विरोधाभास है, उदारहण के लिए, महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या पर देवराज इंद्र आसक्त हो गए और छल कपट से अहिल्या का सामीप्य और शारीरिक समर्पण पा लिया, जिसका दण्ड पति द्वारा अहिल्या को मिला पुरुष बेदाग निकल गया। सीता को अग्नि परीक्षा देने के बाद भी उनके पति द्वारा त्याग दिया गया। वैदिक काल मे मनुवादी विचारधारा ने समाज को जकड़ लिया, स्त्री के सारे अधिकार समाप्त कर दैहिक पवित्रता के मानदंड कठोर से कठोरतम हो गए। यहां तक कि आज भी कई क्षेत्रो में लड़की की पवित्रता को परखने के लिए शादी की पहली रात सफेद चादर बिछाई जाती है। भारतीय समाज में महिलाओं के सम्मान में बेशक देवी व माता जैसे शब्दों के संबोधन का ढोल पीटा जाता रहा हो परन्तु सत्य इसके बिल्कुल विपरीत है।

बलात्कार के बाद समाज में पीड़िता की स्थिति 

बलात्कार जैसे घिनोने कृत्य को बलात्कार पीड़ित महिलाये बुरे सपने की तरह भुलाना भी चाहे तो ये  सुसभ्य समाज अपने जहरीले कटाक्षों से पीड़िता का सीना भेद-भेद कर याद दिलाता रहता है। समाज के व्यंग्य बाणों को सहते हुए यदि वह न्याय के लिए न्याय-व्यवस्था की ओर बढ़ती भी है तो न्याय व्यवस्था के प्रथम चरण पुलिस वालों की सशंकित दृष्टि से घायल हो जाती है। पुलिस के अजीब और संदेहजनक प्रश्नों से वह स्वयं को ही अपमानित महसूस करती है। रही सही पूरी कसर अदालत में अपनी प्रतिभा साबित करते हुए वकील बलात्कार पीड़िता का अपने कुतर्को से कई बार बलात्कार करते है। वकील बलात्कार पीड़िता को चरित्रहीन साबित करने मे अपनी पूरी प्रतिभा और ताकत झोक देते है और कई प्रकरण में तो अपूर्ण साक्ष्यों के कारण व संभावनाओ के स्तर पर पीड़िता को न्याय तक नसीब नही हुआ।

बलात्कार पीड़िता का ये समाज जीना दुर्भर कर देता है, पीड़िता एवं उसके परिवार का बहिष्कार करने लगता है। पीड़िता पर ही समाज की उंगली उठती है उसका चरित्र हनन होने लगता है कई लोग अपने कुतर्को द्वारा पीड़िता को ही दोषी ठहराते है। उससे शादी करने के लिये कोई तैयार नही होता। उसकी स्वतंत्रता, स्वछंदता, दिनचर्या एवं कपड़ो के आधार पर सवालो के कटघरे में उसे खड़ा कर देते है। यहां तक कि अन्य महिलाओं को सुरक्षा के नाम पर घरों में कैद कर दिया जाता है। उनकी स्वतंत्रता छीन ली जाती है।

स्वतंत्र मानसिकता

कुंठित मानसिकता के पुरुषों द्वारा ऐसे घिनोने कृत्य को अंजाम दिया जाता है। परंतु इस कारण सभी पुरुषो को सवालों के घेरे में लेना न्यायसंगत नही हैं। इसी समाज में स्वतंत्र मानसिकता के पुरुष भी हैं जो महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए प्रयासरत है, हाँ ये सच है, कि कम हैं। हालाँकि बलात्कार पीड़िता को परेशान और दुखी करने में महिलाएं भी पीछे नही है। बलात्कार रोकने के लिए हमे स्वतंत्र मानसिकता अपनानी आवश्यक है। जागरूकता का प्रसार करना होगा। अपने घर के पुरुषों से बात करनी होगी महिला सम्मान के बारे में अपने बेटों को समझाना होगा, उनमें पुरुष अहंकार हावी होने से बचाना होगा और महिला सम्मान के संस्कार डालने होंगे। मीडिया को भी जनता में जागरूकता लानी होगी।