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| 10years challange | Rajkumar Rao |
सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ न कुछ चैलेन्ज या ट्रेंड चलते रहते हैं। आजकल सोशल मीडिया पर , ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 10years challange धूम मचा रहा है। यही नही इस चैलेन्ज से कई musically एप्प भी अछूते नहीं हैं। लोग इसे अपने मनोरंजन के लिए स्वीकार भी कर रहे हैं। एक तरफ अपनी 2009और दूसरी तरफ 2019 की फ़ोटो डाली जा रही है, कोलाज पर कोलाज बनाये जा रहे हैं। इस चैलेन्ज को glowupchallange, 2009vs2019 या how hard did aging hit you के नाम से भी जान सकते हो।
सोशल मीडिया में कितने लोगों ने चैलेन्ज स्वीकार किया ?
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| 10 year challange collage |
अमेरिका पत्रिका वायर ने आशंका जताई है कि फेसबुक लोगों का पर्सनल डेटा जमा कर रहा है। इस तकनीक के द्वारा फेसबुक लोगों के चेहरे के अंतर को समझना चाहता है। इसके द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अल्गोरिथम को दुरुस्त करना चाहता हैं।
इस पर कुछ लोगों सवाल उठाए की फेसबुक के पास तो पहले से ही सबके डेटा मौजूद हैं। इस पर केट ओ नाइल ने कहा कि कोई ज़रूरी नहीं कि लोगों ने उसी साल या क्रम से फ़ोटो डाली हो। ऐसा करने से फेसबुक को सही सही और पक्का डेटा मिल गया जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अल्गोरिथम के लिए उपयुक्त होगा।
इस पर फेसबुक ने कहा कि वो लोगों का कोई डेटा नही जमा करता। जिस पर केट ओ नाइल ने उन्हें कैम्ब्रिज अनालीटिका की घटना याद दिलाई, जिसकी चर्चा पूरे विश्व मे हुई। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में भी लोगों के डेटा का इस्तेमाल किया गया था।
क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अल्गोरिथम?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा बनावटी तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता से है, जैसे हैल्लो गूगल या अन्य निर्देश द्वारा मशीन से काम करवाना एवम कंप्यूटर द्वारा आपकी सहायता करना जैसी मशीनी बौद्धिक क्षमता ही हैं।
अब आप याद कीजिए जब भी आप कोई जानकारी लेने के लिए किसी साइट को ओपन करते हैं, उसके बाद उसके या उससे संबंधित ऐड आपके पास आते ही रहते हैं। कोई अदृश्य तकनीक आपकी पसन्द नापसन्द का ख्याल रखती है, क्योंकि आपकी पसन्द नापसन्द बाज़ार के लिए आवश्यक है।
ये ही अल्गोरिथम है।
इस तरह के चैलेन्ज से आप पर आए अंतर को भुनाया जा सकता है। उम्र के साथ आये कई नॉर्मल बदलाव को कंपनियां एब्नॉर्मल बता कर अपने प्रोडक्ट की कैम्पनिंग करती हैं। आपका डेटा मार्केट के लिए बेहद अनिवार्य है।
आशंका तो यहां तक है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिये भी राजनैतिक पार्टियां आपके डेटा को, आपकी मन्शा या रुझान के तौर पर उपयोग कर सकती है।
वर्चुअल दुनिया में भी आप सुरक्षित नहीं है। अतः किसी भी कैम्पनिंग में हिस्सा लेने से पहले उसकी पूरी जानकारी ले लेना आवश्यक है।


